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आईआरएस आंकड़ा उत्पाद:
मार्च 1988 में भारत के प्रथम असैनिक सुदूर संवेदन उपग्रह आईआरएस-1ए के
प्रक्षेपण ने भारतीय अन्तरिक्ष कार्यक्रम की सफल यात्रा में एक पहल की थी ।
विश्व भर में अपने अनुप्रयोग प्रेरित पहुँच के लिए प्रसिद्ध योजना आयोग की
गतिविधियों के तत्वाधान के अंतर्गत राष्ट्रीय प्राकृतिक संसाधन प्रणाली (एनएनआरएमएस)
के संस्थागत ढांचे के तहत भारतीय भू-पर्यवेक्षण गतिविधियां चलाई जाती हैं।
देश में प्रयोक्ता समुदाय को भारतीय सुदूर संवेदन उपग्रह (आईआरएस) तथा
इनसैट की विषयक श्रृंखला में अधिक नीतभारों के साथ भारतीय पर्यवेक्षण
प्रणाली प्रचालनात्मक सेवाएं उपलब्ध कराती हैं। भूमि तथा जल संसाधन प्रबंधन
में विषयक उपग्रहों की श्रृंखला, कार्टोग्राफिक तथा बृहत पैमाना मानचित्रण
अनुप्रयोग; तथा अनुसंधान क्षेत्रों का नियोजन किया जाता है, ताकि आश्वस्त
रूप में प्रचालन सेवाओं की निरन्तरता उपलब्ध करायी जाये।
भू-पर्यवेक्षण उपग्रह
आज विश्व भर में भारतीय सुदूर संवेदन उपग्रह प्रणाली सुदूर संवेदन उपग्रह
श्रृंखला में सबसे विशाल है और सुचारू रूप से कार्यरत है। वर्तमान में 1
उपग्रह यथा आईआरएस-1डी, टीईएस, ओशनसैट-1, रिसोर्ससैट-1, कार्टोसैट-1,
कार्टोसैट-2, कार्टोसैट-2ए, आईएमएस-1, तथा रीसैट-2 अपनी कक्षा में कार्यरत
हैं। आईआरएस उपग्रह श्रृंखलायें स्थानिक स्पैक्ट्रमी तथा कालिक विभेदनों
में आंकड़े उपलब्ध कराती है। इन उपग्रहों के साथ-साथ आगामी वर्षों में
नियोजित विषयक उपग्रहों की श्रृंखला जैसे रिसोर्ससैट, ओशनसैट-2,
कार्टोसैट-3, मेघा ट्रॉपिक्स, सरल तथा इनसैट-3डी के साथ कार्टोग्राफी से
वायुमंडल तक के विविध क्षेत्रों में भारतीय भू-पर्यवेक्षण प्रणाली उत्पाद
तथा सेवा समर्थित अनुप्रयोग उपलब्ध कराती रहेगी।
कार्टोसैट-2
कार्टोसैट-2 भारतीय सुदूर संवेदन उपग्रह (आईआरएस) श्रृंखला का नौवां उपग्रह
एक उन्नत सुदूर संवेदन उपग्रह है, जो दृश्य-विशेष के स्पॉट चित्र लेने में
सक्षम है। जनवरी 10, 2007 को प्रक्षेपित कार्टोसैट-2 में एकल सर्ववर्णीय (पैन्क्रोमैटिक)
कैमरा लगा है, जो 1-6 कि-मी- प्रमार्ज युक्त 1 मीटर स्थानिक विभेदन के
चित्र ले सकता है। यह उपग्रह पथ के साथ-साथ तथा उसके आर-पार .84 डिग्री तक
घुमाने की क्षमता रखता है, ताकि किसी भी क्षेत्र के बार-बार चित्र लिए जा
सकें। इसे 630 कि-मी- की सामान्य ऊँचाईं पर सूर्य तुल्यकाली ध्रुवीय कक्षा
में स्थापित किया गया था तथा इसे 560 कि-मी- की विशेष कक्षा तक 4 दिनों तथा
1 दिन की क्रमश: पुनर्भ्रमण अवधि के लिए लाया जा सकता है।
कार्टोसैट-2 उपग्रह प्रयोक्ता समुदाय को प्रचालन संबंधी सुविधाएं उपलब्ध
कराते हुए अब तक काफी दक्षता से कार्य कर रहा है। इस उपग्रह से प्राप्त
आंकड़ों का प्रयोग खसरा स्तर पर कार्टोग्राफिक अनुप्रयोगों, नगर तथा ग्राम
संरचनात्मक ढांचों के विकास एवं प्रबंधन तथा भूमि सूचना प्रणाली (एलआईएस)
में अनुप्रयोगों के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं। अधिक विवरण के लिए कृपया
यहां से प्रलेख डाउनलोड करें।
कार्टोसैट-1
कार्टोसैट-1 का प्रक्षेपण सतीश धवन अन्तरिक्ष केन्द्र (एसडीएएससी) शार,
श्रीहरिकोटा से पीएसएलवी-सी6 द्वारा मई 05, 2005 को 617 कि-मी- ध्रुवीय
सूर्य तुल्यकाली कक्षा में किया गया। यह उपग्रह 2-5 मी- विभेदन युक्त 30
कि-मी- परिमार्ज के दौ सर्ववर्णी कैमरों पैन (अग्र) तथा पैन (पश्च) आंकड़
उपलब्ध कराता है। अधोबिन्दु के संदर्भ में कैमरों को पथ के साथ .26 डिग्री
तथा -5 डिग्री झुकाव युक्त स्थापित किया है ताकि स्टीरियो युग्म चित्र
उपलब्ध कराए जा सके, जिनका प्रयोग डिजिटल भू-भाग मॉडल (डीटीएम)/डिजिटल
तुंगता मॉडल (डीईएम) तैयार करने के लिए किया जा सके। कार्टोसैट-1 से
प्राप्त आंकड़ों का उपयोग कार्टोग्राफिक मानचित्र, भूकर मानचित्रण अद्यतीकरण,
भूमि-उपयोग तथा जीआईएस अनुप्रयोगों को तैयार करने के लिए किया जाता है।
उपग्रह पर स्थापित एक ऑन-बोर्ड सॉलिड स्टेट रिकार्डर भू-केन्द्र के दृश्य
क्षेत्र में न आने वाले इलाकों के लिए व्यापक आंकड़ा भंडार की सुविधा उपलब्ध
कराता है। अधिक विवरण के लिए कृपया यहां से प्रलेख डाउनलोड करें।
रिसोर्ससैट-1
आईआरएस श्रृंखला के दसवें उपग्रह के रूप में रिसोर्ससैट-1 को अक्टूबर 2003
मेें पीएसएलवी-सी5 द्वारा प्रक्षेपित किया गया। इसे 820 कि-मी- की ऊंचाई
पर ध्रुवीय सूर्य तुल्यकाली कक्षा में स्थापित किया गया। रिसोर्ससैट-1 पर
तीन कैमरे लगे हैं: 5-8 मीटर स्थानिक विभेदन युक्त दृष्य तथा निकट अवरक्त
क्षेत्र में तीन स्पैक्ट्रमी बैंडों में प्रचालित एक उच्च विभेदन लीनियर
इमेंजिंग सेल्फ स्कैनर (लिस-4) कैमरा जिसे स्टीरियो चित्र प्राप्त करने के
लिए पथ के आर-पार. 26 डिग्री तक घुमाया जा सके तथा यह पांच दिनों के
पुर्नप्रवेष के लिए सक्षम है 142 कि-मी- परिमार्ज वाले 23-5 मीटर स्थानिक
विभेदन युक्त लघु तरंग अवरक्त बैंड (स्विर) तथा दृष्य निकट अवरक्त बैंड के
तीन स्पैक्ट्रमी बैंडों में प्रचालित एक मध्यम विभेदन लिस-3 कैमरा, एक
उन्नत बृहत क्षेत्र संवेदक (एविफ्स) दृष्य निकट अवरक्त में प्रचालित तीन
बैंड तथा स्विर में एक बैंड जिसका स्थानिक विभेदन 56 मीटर है तथा दो
एविफ्स कैमरों द्वारा 730 कि-मी- का संयुक्त प्रमार्ज प्राप्त किया जाता
है। इसके साथ-साथ रिसोर्ससैट-1 120 गीगाबिट्स की ऑन-बोर्ड मैमोरी से लैस
है जिससे संपर्क-विहीन चित्रों को प्राप्त करने में सहायता मिलती है। अपने
पूर्ववर्ती उपग्रहों की अपेक्षा रिसोर्ससैट उपग्रह में कई संषोधित घटक
मौजूद है, जिसमें लिस-प्ट कैमरे से तीन बैंडों में 5-8 मी- स्थानिक विभेदन
, 23-5 मी- विभेदन पर एमआईआर बैंड सूचना युक्त संषोधित लिस-प्प्प् जैसा कि
अन्य दृष्य एवं एमआईआर बैंडों के साथ षामिल है। इसके अलावा एविफ्स 10 बिट
विकीरणमिति (रेडियामैट्री) युक्त 56मी- विभेदन पर लिस-3 के समान ही
स्पैक्ट्रमी चैनलों में आंकड़े, 5 दिनों का पुर्नप्रवेष तथा क्षेत्रीय
अध्ययनों के लिए 730 कि-मी- का दृष्य आवरण उपलब्ध कराता है। इस उपग्रह की
विषेशता यही है कि 576 वर्ग कि-मी- से 19,600 वर्ग कि-मी- से 5,42,000
वर्ग कि-मी- तक के दृष्य आवरण सहित एक ही मंच से तीन स्थानिक विभेदनों पर
एक साथ बहु-स्पैक्ट्रमी आंकड़े उपलब्ध होते हैं इन चित्रों का वनस्पति गति
की, फसल की पैदावार का आकलन, आपदा प्रबंधन समर्थन आदि के लिए उपयोग किया
जा रहा है
आईआरएस-1डी
सितम्बर 1997 में प्रक्षेपित आईआरएस-1 डी में तीन कैमरे यथा सर्ववर्णीय
कैमरा (पैन), रेखीय बिंबन स्व-क्रमवीक्षण अर्थात लीनियर इमेजिंग सेल्फ
स्क्नैर (लिस-प्प्प्) लगे हैं पैन कैमरा 70 कि-मी- परिमार्ज के 5-8 मी-
विभेदन में चित्र उपलब्ध कराता है। लिस-प्प्प् का स्थानिक विभेदन दृष्य
निकट अवरक्त (वीएनआईआर) में 23-5 मी- तथा स्विर बैंड में 70-5 मी- है जो
क्रमष: 142 तथा 148 कि-मी- परिमार्ज के चित्र उपलब्ध कराता है। विफ्स का
स्थानिक विभेदन 188 मी- तथा 810 कि-मी- बृहत परिमार्ज है
ओषनसैट-1
ओषनसैट-1 का प्रक्षेपण मई 1999 में पीएसएलवी-सी2 द्वारा किया गया
इसका मुख्य उद्देष्य महसागरीय लक्षणों के जैविक तथा भौतिक अध्ययन में मदद
करना है। इस पर सागर वर्ग मानीटर (ओसीएम) तथा एक बहुत आवृत्ति क्रमवीक्षण
सूक्ष्मतरंग विकीरणमितिक (एमएसएमआर) लगा है। ओसीएम 1420 कि-मी- परिमार्ज
तथा 360 मी- स्थानिक विभेदन युक्त 402-422, 433-453, 480-500, 500-520,
545-565, 660-689, 745-785 तथा 845-885 एनएम बैंड में प्रचालित होता है
वर्तमान में भारतीय क्षेत्र के सागर वर्ण मानीटर आंकड़ों को प्रचालनात्मक
आधार पर एकत्र किया जाता है।
भारत तथा उसके पड़ोसी देषों में सुदूर संवेदन उपग्रह आंकड़ा उत्पादों के
वितरण के लिए राश्ट्रीय सुदूर संवेदन केन्द्र (एनआरएससी) प्रमुख केन्द्र
के रूप में स्थापित है हैदराबाद से 55 कि-मी- दूर षादनगर में एनआरएससी का
एक भू-केन्द्र है जहां पर लगभग सभी समकालीन सुदूर संवेदन उपग्रहों से आंकड़े
अर्जित किए जाते हैं। एनडीसी इसका एक ऐसा भाग जहां पर विविध विभेदनों,
संसाधन स्तरों, उत्पाद माध्यमों, आउट स्केल, क्षेत्र आवरण, पुर्नप्रवेष,
मौसम तथा स्पैक्ट्रमी बैंडों सहित विस्तृत रूचि के आंकड़े उत्पादों का
भंडार है। विभिन्न प्रकार के माध्यमों एवं प्रारूपों पर आंकड़े उत्पादों की
आपूर्ति की जाएगी।
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